कुछ प्रतिक्रियाएं
:
बहुत अच्छे ढंग से लिखा दलित समाज के संघर्ष को व्यक्त करता उपन्यास है. इतने अच्छे
उपन्यास के लिए कैलाश जी बधाई स्वीकार करें.
-सुशीला टाकभौरे, वरिष्ठ
लेखिका
सरल, सहज उपन्यास है. रोचक इतना है कि मुझे एक ही बैठक में पढ़ना पढ़ा. यह उपन्यास
पढ़ा नहीं जाता, पढ़ जाता है. इस उपन्यास में दलित समाज की सच्ची तस्वीर है. कैलाश
जी अच्छे उपन्यास के लिए बधाई!
-अजय नावरिया, प्रो.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली
कैलाश जी, आपका उपन्यास पढ़ा. अच्छे उपन्यास के लिए बधाई! बहुत अच्छा उपन्यास है।
विषयवस्तु और भाषाशैली की दृष्टि से नवीनता है। दलित समाज में हो रहे परिवर्तनों
उनके मुद्दो पर सशक्त अभिवयक्ति है। मैंने आपके उपन्यास को पढना शुरु किया तो यह
मेरे हाथ से नही छूटा. एक बार भी नही।
-अनीता भारती, लेक्चरर
दलित जीवन को कलमबद्ध करने के क्रम में इधर कैलाश चंद चैहान का उपन्यास आया है. यह
उपन्यास इस दृश्टि से महत्वपूर्ण है कि इसमें दलित समाज की एक वाल्मीकि जाति का
भरापूरा चित्र दिखाई देता है. यह चित्र कोई ड्राईंग रूम में सजाने की वस्तु नहीं,
अपितु अपने दर्द को संजोकर उससे उबरने का प्रयास है. साफ दिखता है, उपन्यास विधा
में व्यक्त यह इबारत वाल्मीकि कहे जाने वाले श्रमजीवी समाज के दुखों, पीड़ाओं,
बेचैनी, एवं संघर्षों की यह दास्तान बेहद प्रेरणादायक है. गांव से षहर तक फैले
मेहनतकश, संघर्षरत्त समुदाय की गाथा यथार्थपरक बन पड़ी है. यह संघर्ष गांव से शुरू
होकर शहर तक चलता है. पग-पग पर चुनौतियों, यातनाओं, अवमाननाओं को बर्दाश्त करता
मेहनतकश दलित जन हारता नहीं, अपितु अपने मनुष्य होने को बार-बार साबित करता है.
- डा. गुलाब
कैलाश जी के उपन्यास "सुबह के लिए" की जितनी तारीफ की जाए कम है. यह उपन्यास
इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक दलित समाज के अंदर विपरीत स्थितियों
में भी संघर्षरत रहने की प्रेरणा देता है. वहीं दूसरी और दलितों के बीच फैली
विभिन्न प्रकार की रुढियों और अन्धविश्वासों पर भी करारी चोट करता है . आरक्षण से
लेकर एम.सी.डी. में होने वाले भ्रष्टाचार का भण्डाफोड़ भी इतनी सरलता से करते हैं
और दलित स्त्रियों के उनके कार्य स्थलों पर होने वाले शोषण और उत्पीड़न को भी वे
रेखांकित करना नही भूलते. इसलिए यह उपन्यास मुझे हर दृष्टि से महत्पूर्ण लगा है.
पठनीयता भी गज़ब की है. एक बार अगर आप पढ़ने लगे तो हाथ से पूरा पढ़े बिना नही
छूटेगा. कैलाश जी को मेरी और से दलित साहित्य की इस अमूल्य निधि के लिए बधाई .
-पूनम तुषामड़, चर्चित
कवयित्री